आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

गुरुवार, जून 05, 2014

पर्यावरण को बचाने की पहल

 आज 'विश्व पर्यावरण दिवस' है। देखिये, ये सभी चित्र आपसे कुछ कह रहे हैं। हम भी यदि सोचें तो  अपने पर्यावरण को बचा सकते हैं, सुरक्षित रख सकते हैं।  








शुरुआत अपने घर से कर सकते हैं।


पेड़-पौधे हमारे अच्छे मित्र  हैं।  इन सबका ख्याल भी हमें ही रखना होगा। यदि हम इनका ख्याल नहीं रखेंगे तो बड़े होकर इन्हें कैसे देख पाएंगे।  अपूर्वा पौधों को पानी देते हुए ऐसा ही कुछ सोच रही है  !!










 तैयार हैं न आप सभी, अपने पर्यावरण को बचाने के लिए। 









गुरुवार, मई 22, 2014

नन्ही ब्लॉगर पाखी की ऊंची उड़ान


अक्षिता (पाखी)  देश की सबसे छोटी हिन्दी ब्लॉगर के रूप में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से (मात्र चार वर्ष की उम्र में) सम्मानित हो चुकी हैं। दिल्ली के हिन्दी भवन में इंटरनेशनल ब्लॉगर कांफ्रेंस में जब हिस्सा लेने गयीं तो सभी ने उन्हें गोद में उठा लिया। यहां उन्हें आर्ट और ब्लॉगिंग के लिए राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' का अवार्ड दिया गया। वह 'हिन्दुस्तान टाइम्स वुमेन अवार्ड' के लिए सबसे कम  उम्र में भी नॉमिनेट हो चुकी हैं। अब तो जैसे जहां भी ब्लॉगरों का सम्मेलन होता है तो पाखी को जरूर बुलाया जाता है। जब वह लखनऊ, काठमांडो के अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में आयीं तो आयोजकों के अलावा वहां देश-दुनिया से आये चुनिंदा ब्लॉगरों ने खूब आशीर्वाद दिया। अब पाखी स्वयं अपने ब्लॉग को होल्ड करती हैं। जब कुछ नया रचित होता है तो तत्काल पोस्ट कर देती हैं। अक्षिता (पाखी) बड़ी होकर आईएएस बनकर गरीबों की मदद करना चाहती हैं.

‘मेरा नाम अक्षिता है। मेरा निक नेम पाखी है। पाखी यानी पक्षी या चिड़िया। मैं भी तो एक चिड़िया हूं जो दिन भर इधर-उधर फुदकती रहती हूं। मेरा जन्म 25 मार्च 2007 को कानपुर में हुआ और फिलहाल मैं क्लास दो की स्टूडेंट हूं। ..’ यह है ‘पाखी की दुनिया’ की नन्ही ब्लॉगर अक्षिता यादव उर्फ पाखी के ब्लॉग की चंद लाइनें। पाखी देश की पहली सबसे कम उम्र की हिन्दी ब्लॉगर के रूप में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (2011) विजेता हैं। उन्हें यह पुरस्कार मात्र चार साल की उम्र में महिला और बाल विकास मंत्रालय की तत्कालीन मंत्री कृष्णा तीरथ द्वारा प्रदान किया गया। इसी साल नयी दिल्ली के हिन्दी भवन में आयोजित इंटरनेशनल ब्लॉगर कांफ्रेंस में ‘बेस्ट बेबी ब्लॉगर अवार्ड’ से पाखी को नवाजा गया। हिन्दुस्तान टाइम्स वुमेन अवार्ड (2013) के लिए भी उन्हें नन्ही ब्लॉगर के रूप में अभिनेत्री शबाना आजमी, सांसद डिम्पल यादव और संगीतकार साजिद द्वारा सम्मानित किया गया। लखनऊ में आयोजित द्वितीय अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन (2012) में विशेष रूप से सम्मानित किया गया। काठमांडो में आयोजित तृतीय अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में वह सबके आकर्षण का केन्द्र रहीं और वहां के पूर्व मंत्री तथा संविधान सभा के अध्यक्ष अर्जुन नरसिंह केसी  ने सम्मानित किया।

अक्षिता (पाखी)  का जन्म कानपुर में हुआ। उस वक्त उनके पिता केके यादव पोस्टल सर्विसेज में निदेशक थे। मां आकांक्षा और पापा अपने ब्लॉग में कुछ न कुछ पोस्ट किया करते थे। पाखी ने पूछा कि आप लोग मेरी पेंटिंग्स क्यों नहीं पोस्ट करते! पाखी की बात सबको क्लिक कर गयी। 24 जून 2009 को शुरू हुआ ‘पाखी की दुनिया’ का ब्लॉग। शुरू-शुरू में ड्राइंग को अपलोड किया गया। पाखी का क्रिएशन यहीं तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अपने किस्से- कहानी गढ़ने शुरू किये जो उन्हीं की भाषा में मां लिखकर पोस्ट कर देतीं। फिर कविताएं और विचार भी पोस्ट होने लगे। पिता ने कैमरा खरीदकर दिया तो पाखी के खींचे बेहतरीन चित्र भी ब्लॉग में जगह पाने लगे। विविधता लिये पाखी का ब्लॉग बेहद पसंद किया जाने लगा। देश की सीमा को लांघकर लगभग सौ देशों में 272 लोग नियमित फालोअर बन गये। जब पाखी की पहुंच फेसबुक तक हुई तो वहां तो लगभग 1000 फालोअर बन गये। गूगल प्लस में भी 240 फालोअर पाखी के ब्लॉग के पक्के पाठक बन गये। पाखी की इसी क्रियेटिविटी और लोकप्रियता से प्रभावित होकर राजस्थान के मशहूर बाल साहित्यकार दीनदयाल शर्मा ने अपनी बाल कविता की किताब ‘चूं-चूूं’ पर पाखी का चित्र ही लगा लिया।

पाखी के ब्लॉग में ‘शब्द शिखर’, ‘शब्द सृजन की ओर’, ‘डाकिया डाक लाया’, ‘सप्तरंगी प्रेम’, ‘बाल दुनिया’, ‘उत्सव के रंग’, ‘अपूर्वा’ जैसे उनके पारिवारिक ब्लॉगों के भी लिंक हैं। पाखी के ब्लॉग में  बेहद रोचक जानकारियां, पेंटिंग, फोटोग्राफ, कविताएं, संस्मरण, विचार, पत्र, यात्रा वृत्तांत और स्कूल की गतिविधियों के अलावा परिवार में होने वाली छोटी और सच्ची घटनाएं भी निरंतर जगह पा रही हैं। पाखी के कुछ पोस्ट यथा ‘बेटियों को मारो नहीं’, ‘ममा का जन्मदिन आया’, ‘पाखी माने पंछी या चिड़िया’ और अंडमान-निकोबार के 62वें वन महोत्सव पर ‘पाखी का गुलाब’ आदि पोस्ट सचमुच पठनीय हैं। पाखी अब अपनी साम्रगी अपने ब्लॉग (http://pakhi-akshita.blogspot.in/) पर स्वयं अपलोड कर लेती हैं। 

अक्षिता (पाखी)  की मम्मी आकांक्षा यादव बताती हैं कि पाखी बेहद शरारती हैं लेकिन उससे ज्यादा क्रियेटिव हैं। उन्हें पेंटिंग के अलावा फोटोग्राफी, कम्प्यूटर गेम, डांस और पढ़ना भाता है। वह अपने स्कूल गर्ल्स हाई स्कूल, इलाहाबाद में क्लास दो की स्टूडेंट हैं। शाकाहारी पाखी को पनीर के बने आइटम्स, पनीर पुलाव, पनीर परांठे, पनीर पकौड़े और आइसक्रीम बेहद पसंद हैं। पाखी की एक छोटी बहन अपूर्वा भी हैं जिनके साथ उनकी खूब छनती है। पाखी अंडमान-निकोबार को काफी मिस करती हैं जहां उन्होंने काफी इंज्वॉय किया और अपने ब्लॉग में शेयर भी किया। 

अक्षिता (पाखी)  के पिता केके यादव बताते हैं कि पाखी जब मात्र दो साल की थीं तभी से मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप से दोस्ती कर ली थी। अगर देखा जाए तो आज बच्चों के खिलौने बदल गये हैं। नये-नये गैजेट्स ही उनके खिलौने बन गये हैं। यह बदलाव अच्छा है। ये बच्चों में क्रियेटिविटी बनाये रखते हैं। आज पाखी अपना ब्लॉग स्वयं हैंडिल करती हैं। नेट द्वारा वह विस्तृत संसार में विचरण कर अपनी जानकारी को बढ़ा रही हैं। पाखी बड़ी होकर आईएएस ऑफिसर बनना चाहती हैं। पाखी को अपनी किताबें फेंकना या बेचना पसंद नहीं है। वह अपनी किताबें, खिलौने और कपड़े जरूरतमंद को देना पसंद करती हैं।

जब अक्षिता (पाखी)  की पहुंच फेसबुक में हुई तो वहां तो लगभग 1,000 फॉलोअर बन गये। गूगल प्लस में भी 240 फॉलोअर्स पाखी के ब्लॉग के पक्के पाठक बन गये.

(हिंदी के प्रतिष्ठित अख़बार 'राष्ट्रीय सहारा' के बाल परिशिष्ट 'जेन एक्स' (22 मई, 2014) में अक्षिता (पाखी) के बारे में ''नन्ही ब्लॉगर पाखी की ऊंची उड़ान'' शीर्षक से प्रकाशित फीचर आलेख. इसे आप http://www.rashtriyasahara.com/epapermain.aspx?queryed=15 ऑनलाइन लिंक पर जाकर भी पढ़ सकते हैं। )

रविवार, मई 18, 2014

'Akshita (Pakhi) : पाखी की दुनिया' की फेसबुक पर लाइकिंग हजार के पार




हमारे फेसबुक  पेज (https://www.facebook.com/AkshitaaSingh) के प्रति आप सभी के प्यार, स्नेह, समर्थन और शुभकामनाओं के लिए आभार। आज इस पेज को लाइक करने वालों की संख्या 1, 000 से ऊपर पहुँच गई !!

Thanks for all Support, Likings n Blessings for our Facebook Page (https://www.facebook.com/AkshitaaSingh). Today this paje finally got more than 1,000 likes.


बुधवार, मई 14, 2014

बुद्धम् शरणम गच्छामि

बुद्धम् शरणम गच्छामि … लुम्बिनी में जन्म, बोधगया में ज्ञान, सारनाथ में प्रथम उपदेश, कुशीनगर में निर्वाण …… इनमें से बोधगया को छोड़कर सभी जगहों का दर्शन हम कर चुके हैं।  संयोगवश, आज बुद्ध पूर्णिमा भी है।  बुद्ध का माध्यम मार्ग जीवन का सार भी बताता है। बुद्ध पूर्णिमा पर शत-शत नमन !!



जब पिछले साल हम लुम्बिनी, नेपाल गए थे तो वहाँ बुद्ध की जन्मस्थली के बाहर का दृश्य।



सारनाथ में प्रथम उपदेश



कुशीनगर में निर्वाण


रविवार, मई 11, 2014

वो परी कोई और नहीं, माँ ही थी


बचपन में
माँ रख देती थी चाॅकलेट
तकिये के नीचे
कितना खुश होता
सुबह-सुबह चाॅकलेट देखकर।
माँ बताया करती 
जो बच्चे अच्छे काम     
करते हैं
उनके सपनों में परी आती
और देकर चली जाती चाॅकलेट।
मुझे क्या पता था
वो परी कोई और नहीं
माँ ही थी।



 आज मदर्स डे है।  मेरी मम्मी बहुत प्यारी हैं, केयरिंग हैं और बिना कहे ही मेरी बात समझ जाती हैं।  मेरी मम्मी मेरे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं और उनकी वजह से मैं आज इस दुनिया में हूँ। मैं हर छोटी-बड़ी बात  मम्मी से शेयर करती हैं। जब भी कभी किसी परेशानी या उलझन में होती हूँ तो मम्मी  से बात करके जो सुकून मिलता  है, वह कहीं नहीं। मम्मी  की प्यार भरी डांँट, प्यार, दुलार, मम्मी के हाथ का बना हुआ खाना,  बीमार होने पर रात भर मम्मी  का जगकर गोदी में सर लिए बैठे रहना, हमारी हर छोटी से छोटी जिद को पूरी करना .... सच कहूँ तो ऐसा लगता है जैसे मम्मी भगवान का ही दूसरा रूप है।

(इस खास दिन पर पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी की एक कविता उनके काव्य-संग्रह 'अभिलाषा' से )


माँ का जीवन में महत्वपूर्ण स्थान


मेरी मम्मी बहुत प्यारी हैं, केयरिंग हैं और बिना कहे ही मेरी बात समझ जाती हैं।  मेरी मम्मी मेरे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं और उनकी वजह से मैं आज इस दुनिया में हूँ। मैं हर छोटी-बड़ी बात  मम्मी से शेयर करती हैं। जब भी कभी किसी परेशानी या उलझन में होती हूँ तो मम्मी  से बात करके जो सुकून मिलता  है, वह कहीं नहीं। मम्मी  की प्यार भरी डांँट, प्यार, दुलार, मम्मी के हाथ का बना हुआ खाना,  बीमार होने पर रात भर मम्मी  का जगकर गोदी में सर लिए बैठे रहना, हमारी हर छोटी से छोटी जिद को पूरी करना .... सच कहूँ तो ऐसा लगता है जैसे मम्मी भगवान का ही दूसरा रूप है।

गुरुवार, अप्रैल 24, 2014

बच्चे, चुनाव और टॉफी

टाफी भला किसे नहीं अच्छी लगती।  हम बच्चों की  छोड़ भी दीजिये तो बड़ों के मुंह में भी पानी आ जाता है। 


अब  देखिये,इस चुनाव में बच्चों की टाफी तो चर्चा में है, पर बच्चों से जुड़े मुद्दे नहीं।




 क्या सिर्फ इसलिए कि बच्चे वोट नहीं दे सकते !!

शुक्रवार, अप्रैल 04, 2014

स्कूल है रोज जाना

हॉलिडेज़ ख़त्म, 3 अप्रैल से स्कूल शुरू। अब पूरे अप्रैल भर चलेंगी क्लासेज़। नई किताबें, नया जोश। क्योंकि अब हम पहुँच गए हैं क्लॉस 2 में।  लीजिए, इसी बात पर पापा का एक बाल-गीत भी, जिसे उनके बाल-गीत संग्रह 'जंगल में क्रिकेट' से लिया है !!



स्कूल है रोज जाना
स्कूल जाएंगे हम रोजाना,
नहीं करेंगे कोई बहाना।
भूख अगर लग जाए वहाँ, 
टिफिन खोल खाएंगे खाना।


टीचर की सब मानें बात,
मन से करें पढ़ाई।
हम सब बच्चे मिलजुल रहते,
करें न कभी लड़ाई।


पढ़-लिख कर हम बढ़ेंगे आगे,
सपने सच करेंगे।
शिक्षा सब कुछ देगी हमको,
इसका मान करेंगे। 

मंगलवार, मार्च 25, 2014

अक्षिता (पाखी) का हैप्पी बर्थ-डे


25 मार्च, इस दिन का हमें बेसब्री से इंतजार रहता है।  


 आखिर, इस दिन हमारा हैप्पी बर्थ-डे जो है।  


वैसे हमारा बर्थडे जिस दिन पड़ता है, स्कूल की हालीडेज़ होती हैं। अत: हम अपना बर्थडे कभी स्कूल  में सेलिब्रेट  नहीं कर पाए।  पर इससे जुडी एक शानदार बात यह है कि अपने हैप्पी बर्थडे सेलिब्रेशन के अगले वीक ही हम अगली क्लास में प्रमोट हो जाते हैं।  इस बार तो हम क्लास 2 में चले जाएंगे। सो डबल सेलिब्रेशन का मौका बनता है।  

हमारे हैप्पी बर्थ-डे पर आप सभी के आशीर्वाद और प्यार का इंतज़ार  रहेगा !!







बुधवार, मार्च 19, 2014

फूलों की खूबसूरती

अरे वाह, कितना सुहाना मौसम है।  ठण्ड जा चुकी है और जो धूप अच्छी लगती थी, अब परेशान करती है।  खूब मस्ती करने और घूमने-फिरने के दिन। इस मौसम में चारों तरफ खिले फूल तो हमें बहुत प्यारे लगते हैं।  अपने लॉन में इन फूलों की सुंदरता को देखना, उन पर तितलियों और भौरों का मंडराना। .... मन तो करता है कि तितलियों को दौड़कर पकड़ लूँ। कई बार इनके पीछे भागती भी हूँ, पर ये तो हमसे भी तेज उड़ती हैं।  कभी इधर, कभी उधर   पर यदि हम इन्हें पकड़ लेंगे  तो फिर इनके पीछे दौड़ेंगे कैसे ! आप भी इन फूलों की खूबसूरती देखिये, आखिर क्लिक तो हमने किया है !!







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रविवार, मार्च 16, 2014

होली जमकर खेलें


होली पर्व पर आप सभी को बधाइयाँ। 







होली जमकर खेलें, पर इको-फ्रेंडली होली से भी नाता जोड़ें। 


ये गुझिया आप सबके लिए। 


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शनिवार, मार्च 15, 2014

छुट्टियों के दिन आये


हॉलिडेज़ किसे नहीं अच्छे लगते हैं। साल भर की पढाई, फिर एक्जाम्स और फिर लम्बी हॉलिडेज़। अब  हमारे भी एक्जाम्स 8 मार्च को ख़त्म  हो चुके हैं।  महीने के अंत  में रिजल्ट आउट होगा  और फिर नया क्लास।  इस बार हम क्लास 2 में चले जाएंगे।नई-नई  किताबें, नई  क्लास टीचर। .... कितना कुछ बदला-बदला और  नया सा लगता है। पर फ़िलहाल तो हॉलिडेज को इंजॉय करने के दिन हैं। सो गेट कूल !!   

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रविवार, मार्च 02, 2014

शुरू हो गए एक्ज़ाम्स

इस समय हमारे एक्जाम्स चल रहे हैं। कल 3 मार्च को शुरू होकर ये 8 मार्च को ख़त्म हो जायेंगे। एक्जाम्स के लिए हमें मार्निंग में 7  बजे ही स्कूल पहुँच जाना होगा।  पर यह सोचकर बहुत ख़ुशी होती है कि एक्जाम्स के बाद  अब हम क्लास 2 में  जायेंगे।  


वाह, नई-नई  किताबें, नई  क्लास टीचर। .... कितना कुछ बदला-बदला और  नया सा लगता है।

शुक्रवार, जनवरी 31, 2014

पाखी लिटिल ब्लॉगर


पाखी लिटिल ब्लॉगर 

बच्चों, जब तक तुमने सिर्फ अपने से बड़े लोगों को ही ब्लागिंग करते हुए देखा होगा। लेकिन 6 साल की नन्हीं पाखी को भी ब्लागिंग का शौक है। अपने इसी शौक के दम पर ब्लागिंग अवार्ड जीतकर वह बन गई है, देश की सबसे नन्ही ब्लागर। पाखी के नाम से मशहूर अक्षिता यादव कैसे बनी ब्लॉगर और क्या हैं उसके शौक, तुम भी जानो।

अंडमान निकोबार के म्यूजियम का नजारा हो, पर्यावरण दिवस पर पेड़ बचाने का संदेश या फिर पुरानी किताबों न बेचने की राय। यह सब मिलेगा नन्ही पाखी यानी अक्षिता यादव के ब्लॉग ‘पाखी की दुनिया’ (http://pakhi-akshita.blogspot.in/) में। बच्चों, इलाहाबाद में पहली कक्षा में पढ़ने वाली अक्षिता वैसे तो तुम्हारी तरह ही है। लेकिन ब्लॉग  की दुनिया में उसकी एक्टिविटी उसकी अलग पहचान बनाती है।

ऐसे हुई ब्लागिंग की शुरुआत

पाखी की ब्लागिंग की शुरूआत कुछ अलग ही अंदाज में हुई थी। दरअसल, बचपन से ही वह ढेरों पेंटिंग्स बनाती थी। लेकिन उसके मम्मी-पापा उसे सहेजते नहीं थे। ऐसे में जब पाखी ने अपने मम्मा-पापा को ब्लॉग पर कविताएं लिखते देखा तो पूछ लिया कि ’जब आप अपनी कविताएं इस तरह संभाल रहे है, तो मेरी पेटिंग्स क्यों फेंक देते हैं?’ बस फिर क्या था उसके पापा ने बना दिया ब्लॉग ’पाखी की दुनिया’ और डाल दी उस पर उसकी सारी पेंटिग्स। धीरे-धीरे पाखी की कलाकारी को ब्लागिंग के सहारे पहचान मिलने लगी।

365 पोस्ट-268 फालोअर

24 जून, 2009 को पाखी का ब्लॉग शुरू हुआ। तब से अब तक नन्ही पाखी के ब्लॉग  पर 365 पोस्ट प्रकाशित हो चुकी हैं। इतना ही नहीं उसके ब्लॉग  पर 268 फालोअर हैं। फेसबुक पर यही आंकड़ा बढ़कर 830 है। यानी, बच्चे ही नहीं पाखी की दुनिया में सैर करने वालों में बड़े भी बहुत सारे हैं । दुनियाभर के 100 से भी ज्यादा देशों में पाखी का ब्लॉग पढ़ा जाता है।
पैरेंट्स मैनेज करते हैं ब्लॉग 

पाखी अभी तुम्हारी तरह ही छोटी है, इसलिए उसके ब्लॉग  को उसके मम्मी-पापा ही चलाते हैं। लेकिन पाखी ने अब कई सारे काम करने सीख लिए हैं। जैसे अब अपनी पेंटिग को ब्लॉग  पर अपलोड करना सीख गई है। बाकी कई सारे काम भी वो खुद करने लगी है। इस तरह सीखते-सीखते निश्चित तौर पर वो आगे चलकरब्लॉग  पूरी तरह से खुद ही संभालने लग जाएगी।

मिला ब्लागर अवार्ड

सिर्फ 4 साल 8 महीने की उम्र में ही पाखी को आर्ट और ब्लागिंग के लिए राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। यह पुरस्कार पाने वाली वो सबसे छोटी उम्र की बच्ची है। इतना ही नहीं, ऐसा पहली बार हुआ जब सरकार की ओर से ब्लागिंग के लिए किसी को सम्मानित किया गया। सरकार की ओर से 1996 से शिक्षा, संस्कृति, कला, खेलकूद और संगीत आदि के क्षेत्र में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार दिए जाते हैं। साल 2011  की अंतराष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन में पाखी को ‘श्रेष्ठ नन्ही ब्लागर‘ का अवार्ड दिया गया था। नई दिल्ली में हुए इस कार्यक्रम में यह पुरस्कार उसे उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने दिया था। 

('हरिभूमि' अख़बार की पत्रिका 'बाल भूमि' (16 जनवरी, 2014) में नन्ही प्रतिभा के अन्तर्गत लिटिल ब्लॉगर अक्षिता (पाखी) पर प्रकाशित चयनिका मनीषा  क़ी एक रिपोर्ट ) 

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