आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

रविवार, अगस्त 24, 2014

मम्मी क्या होने वाला है?

आजकल हमारे प्राइम मिनिस्टर अंकल मोदी जी गंगा जी को स्वच्छ करने के लिए पहल किये हुए हैं।  इलाहाबाद और बनारस में तो हम अक्सर देखते हैं कि गंगा जी में ढेर सारी गन्दगी फैली हुई है।  सोचिये कि यदि गंगा जी और अन्य नदियों में हम ऐसे ही गन्दगी फैलाते रहेंगे तो फिर स्वच्छ और साफ़ पानी कहाँ से आएगा।  इस गंदे पानी से जो बीमारी फैलती है, वह तो कइयों की मौत का कारण भी बनती है।  जरूरत है कि हम सभी इस और अपनी तरफ से पहल करें और नदियों में गन्दगी न फैलाएँ। इसी सन्दर्भ में श्री उमेश चौहान अंकल जी ने एक सुंदर सी कविता भी 'पाखी की दुनिया' के लिए भेजी है।  आप सब इसे पढ़ें और सोचें -

मम्मी क्या होने वाला है?
गंगाजल कितना काला है?

तुम तो कहती उतर स्वर्ग से
शिव के केशों से गुजरी हैं,
ऊँचे हिम-नद का निर्मल जल
बाँहों में भरकर बहती हैं,
फिर हमने इसके पानी में
क्यों इतना कचरा डाला है? मम्मी क्या होने ……

छिड़क-छिड़ककर जिसके जल को
तुम देवों को नहलाती हो,
पूरे घर को पावन करती
अंत समय भी पिलवाती हो,
उसके जल की इस हालत पर
मेरा मन रोने वाला है। मम्मी क्या होने ……

गंगा ही क्यों सारी नदियों
को हमने गंदा कर डाला,
सूख गए गरमी के सोंते
भू-जल इतना खींच निकाला
कुँए, ताल सब सुखा दिए, अब
पीते जल बोतल वाला हैं। मम्मी क्या होने ……

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उमेश कुमार सिंह चौहान (यू. के. एस. चौहान)
सम्पर्क: सी-II/ 195, सत्य मार्ग, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली–110021 (मो. नं. +91-8826262223).

जन्म: 9 अप्रैल, 1959 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ जनपद के ग्राम दादूपुर में।
शिक्षा: एम. एससी. (वनस्पति विज्ञान), एम. ए. (हिन्दी), पी. जी. डिप्लोमा (पत्रकारिता व जनसंचार)।

साहित्यिक गतिविधियाँ:

प्रकाशित पुस्तकें: ‘गाँठ में लूँ बाँध थोड़ी चाँदनी’ (प्रेम-गीतों का संग्रह) - सत्साहित्य प्रकाशन, दिल्ली (2001), ‘दाना चुगते मुरगे’ (कविता-संग्रह) - सत्साहित्य प्रकाशन, दिल्ली (2004), ‘अक्कित्तम की प्रतिनिधि कविताएं’  (मलयालम के महाकवि अक्कित्तम की अनूदित कविताओं का संग्रह) - भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली (2009), ‘जिन्हें डर नहीं लगता’ (कविता-संग्रह) - शिल्पायन, दिल्ली (2009), एवं ‘जनतंत्र का अभिमन्यु’ (कविता – संग्रह) - भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली (2012), मई 2013 से हिन्दी दैनिक समाचार-पत्र 'जनसंदेश टाइम्स' (लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी एवं गोरखपुर से प्रकाशित) में साप्ताहिक स्तम्भ-लेखन

संपादित पुस्तकें: 'जनमंच' (श्री सी.वी. आनन्दबोस के मलयालम उपन्यास 'नाट्टुकूट्टम' का हिन्दी अनुवाद) - शिल्पायन, दिल्ली (2013)

सम्मान: भाषा समन्वय वेदी, कालीकट द्वारा ‘अभय देव स्मारक भाषा समन्वय पुरस्कार’ (2009) तथा इफ्को द्वारा ‘राजभाषा सम्मान’ (2011)

सोमवार, अगस्त 18, 2014

एक साथ कित्ती खुशियाँ

कृष्ण जन्माष्टमी का दिन तो हमें बहुत अच्छा लगता है। एक तरफ भगवान कृष्ण जी का जन्मोत्सव, वहीँ जन्माष्टमी हमारे परिवार के लिए इसलिए भी और महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि जन्माष्टमी के दिन ही पापा और नानी जी का भी जन्म हुआ था।
  

...है न ट्रिपल ख़ुशी वाली बात। तो चलिए आप भी हमारी इस ख़ुशी में शरीक होइए !!

(चित्र में : बेटियों अक्षिता और अपूर्वा के साथ केक काटते पापा श्री कृष्ण कुमार यादव।  साथ में दादा जी। )

आज माखनचोर आयेंगे


आज का दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आज कृष्ण जन्माष्टमी है। आज ही तो देर रात माखन चोर श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। कृष्ण जी की बाल- लीलाएं तो मुझे बहुत अच्छी लगती हैं। वे भी तो हम बच्चों जैसे ही खूब शरारतें करते थे और फिर उनकी मैया यशोदा कित्ता डांटती थी। लेकिन कृष्ण जी भी कम नहीं थे, अंतत: मैया को अपनी तरफ कर ही लेते थे और फिर गोपियाँ देखती ही रह जाती थीं। 


वैसे इस बार दही हांडी में 12 साल तक के बाल गोपालों के भाग लेने पर पाबन्दी लगने के बाद कुछ लोग उदास भी हैं। पर मुझे लगता है कि यह सही कदम उठाया गया है। दही हांडी पिरामिड में ऊपर के तीन से चार थर में छोटे छोटे बच्चों को चढ़ाया जाता है और जब थर गिरता है तो बच्चों को गंभीर चोटें आती हैं।  इसके चलते कई की  मृत्यु हो जाती है तो कई अपंग हो जाते हैं। अब सोचिये कि क्या यह सब बाल कृष्ण को अच्छा लगेगा।  जीवन से बढ़कर कुछ भी नहीं है। 


!! कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाइयाँ।


शुक्रवार, अगस्त 15, 2014

प्राइम मिनिस्टर अंकल ने तो सोचा, अब आप सबकी बारी है !


स्वतंत्रता दिवस पर  प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा लालकिले से दिए गए भाषण को आज हमने भी सुना और देखा। उनकी एक बात हमें बहुत मार्मिक लगी। 

उन्होंने भ्रूण हत्या पर  बेहद तल्खी से कहा कि,  हमने हमारा लिंगानुपात देखा है...? समाज में यह असंतुलन कौन बना रहा है...? भगवान नहीं बना रहे...! मैं डॉक्टरों से अपील करता हूं कि वे अपनी तिजोरियां भरने के लिए किसी मां की कोख में पल रही बेटी को न मारें... बेटियों को मत मारो, यह 21वीं सदी के भारत के माथे पर कलंक है।

प्राइम मिनिस्टर अंकल ने तो सोचा, अब आप और सबकी बारी है ! सोच बदलो, देश बदलो !!

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा


सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा

हम बुलबुले हैं उसकी, ये गुलिस्तां हमारा
पर्वत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमां का
वो संतरी हमारा, वो पासवाँ हमारा
सारे जहाँ .............................
गोदी में खेलती हैं, जिसकी हजारों नदियाँ
गुलशन हैं जिसके दम से रश्के जिना हमारा
सारे जहाँ............................
मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम(2),वतन है, हिन्दोस्तां हमारा
सारे जहाँ से..........................



स्वतंत्रता दिवस पर हमने पापा के लिए यह प्यारा सा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा बनाया। वाकई यह दिन हम सभी की जिंदगी में कितना मायने रखता है। एक तरफ ख़ुशियाँ तो दूसरी तरफ जिम्मेदारी का एहसास। स्वतंत्रता दिवस पर आप सभी को बधाईयाँ !!







मंगलवार, अगस्त 12, 2014

बहना ने बहना की कलाई पर प्यार बाँधा है ...

रक्षाबंधन का त्यौहार (10 अगस्त) हमने भी खूब अच्छे से मनाया। हम बहनों  ने एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधकर इस त्यौहार को सेलिब्रेट किया। मुझे एक बात समझ  में नहीं आती कि  आखिर  रक्षाबंधन त्यौहार को भाई-बहन से ही क्यों जोड़ते हैं। क्या वाकई भाई, बहनों की रक्षा करते हैं ?  यदि ऐसा होता तो हमें रोज लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएँ नहीं सुनाई देतीं। अब जरूरत सोच बदलने की है। अब लड़कियों को अपनी रक्षा लिए खुद आगे आना होगा, तभी समाज में वास्तविक बदलाव आ सकेगा !!  










सोमवार, अगस्त 11, 2014

आप भी एक पौधा लगाकर देखिये


10 अगस्त को पापा का जन्मदिन भी था और रक्षाबंधन भी। इस शुभ दिन पर हमने खूब सारे पौधे लगाए। ममा-पापा ने पूरे परिवारजनों से पौधे लगवाए। पापा ने तो बड़ी अच्छी बात कही, ''जब ये पौधे बड़े होकर लहलहाएंगे, उन पर फूल खिलेंगे, फल उगेंगे तो चिड़ियों की चहचहाहट के बीच प्रकृति भी हमें दिल से आशीष देगी !! ''

मुझे तो प्रकृति से बहुत प्यार है।  कई बार सोचती हूँ कि इसके लिए कुछ करूँ।  वाकई पौधरोपण से अच्छा कोई आइडिया नहीं हो सकता।   इस समय तो बारिश का मौसम है, पर इसके बाद  मैं और अपूर्वा सभी पौधों को प्रतिदिन पानी देंगे और  देखेंगे कि ये कैसे बड़े होते हैं !!


आप भी एक पौधा लगाकर देखिये, अच्छा लगेगा !!

रविवार, अगस्त 10, 2014

पापा सिर्फ हमारे पापा ही नहीं, बेस्ट फ्रेंड भी हैं



 आज पापा जी  का हैप्पी बर्थ-डे है। अभी 30 जुलाई को ममा का हैप्पी बर्थ-डे सेलिब्रेट किया, 31 जुलाई को पापा का प्रमोशन और अब 10 अगस्त को पापा का हैप्पी बर्थ-डे। इसे कहते हैं ट्रिपल हैपीनेस।  फ़िलहाल तो आज पापा को जन्मदिन पर खूब सारी प्यारी-प्यारी विशेज़, बधाइयाँ और प्यार।  


पापा सिर्फ हमारे पापा ही नहीं हैं , बेस्ट फ्रेंड भी हैं।  उनके साथ अपनी ढेर सारी बातें शेयर करती हूँ और ये भी हमने उतना ही प्यार करते हैं , समझाते हैं और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।  


!! Happy Birthday Papa !!


शनिवार, अगस्त 09, 2014

सोचिएगा : कन्या भ्रूण हत्या न रुकेगी, तो फिर राखी किससे बँधवाएंगे


कल रक्षाबंधन-फेस्टिवल है। इस दिन को हम खूब इंजॉय करते हैं। अपूर्वा और मैं एक दूसरे को खूब सारी राखियाँ बाँधते हैं और फिर मुँह मीठा तो होगा ही। फेस्टिवल का मौका हो और गिफ्ट्स न मिलें, भला ऐसे कैसे हो सकता है।

पर एक बात जरूर हमारे दिमाग में आती है कि लोग जिस तरह से कन्या भ्रूण हत्या करते हैं, उससे तो समाज से लड़कियाँ ही ख़त्म हो जाएंगीं। …फिर सोचिये भला की आपकी कलाई में प्यारी सी राखी कौन बाँधेगा। इसलिए इस बारे में भी अभी से सोचना आरम्भ कीजिए।   

और हाँ एक बात और, राखी की त्यौहार को सिर्फ भाई-बहन तक ही सीमित न कीजिए। इसे हर रिश्ते से जोड़िये।  बहन की रक्षा सिर्फ भाई ही नहीं करता,  बहनें भी तो करती हैं। पापा बता रहे थे कि सबसे पहली राखी इंद्र देव की पत्नी इंद्राणी ने उनकी रक्षा के लिए बाँधी थी। 

आप सभी लोगों को भी रक्षाबंधन-फेस्टिवल पर बधाइयाँ और आपका आशीर्वाद तो हमें मिलेगा ही। 

शुक्रवार, अगस्त 01, 2014

पापा के प्रमोशन की ख़ुशी


यह तो ख़ुशी का मौका है।  हमारे पापा श्री कृष्ण कुमार जी अब सलेक्शन ग्रेड में प्रमोट हो गए हैं।  30 जुलाई को ममा का हैप्पी बर्थडे और अगले दिन ही 31 जुलाई को पापा का प्रमोशन। यह तो डबल सेलिब्रेशन का मौका बन गया। हमारी तो बल्ले-बल्ले हो गई। जमकर मिठाइयाँ, केक और चॉकलेट खाई और फिर शॉपिंग और मूवी तो बनती ही है। पापा बता रहे थे कि उनके बैच के ऑफिसर्स का यह प्रमोशन लम्बे समय से ड्यू था, तभी सभी लोगों को यह प्रमोशन 1 जनवरी 2014 से मिला है। पापा दि ग्रेट को ढेर सारी  बधाइयाँ और प्यार। आप यूँ ही खूब तरक्की करते रहें।  



(ज्यादा जानकारी के लिए आप ये प्रेस-क्लिप्स देख सकते हैं)


मंगलवार, जुलाई 29, 2014

ममा का हैप्पी-बर्थ डे



हैप्पी बर्थडे कितना प्यारा शब्द लगता है।  हर कोई अपने इस स्पेशल दिन का इंतज़ार करता है।  बड़े जितने मन से करते हैं, हम बच्चे उतने ही दोगुने मन से।  आखिर घर में बर्थडे किसी का हो, पर सबसे ज्यादा मस्ती तो हम बच्चों की ही होती है। फिर, मम्मा-पापा का बर्थडे तो सबसे स्पेशल होता है।  कितनी तैयारियां करनी पड़ती हैं इसके लिए।  बर्थडे केक, गिफ्ट्स, कार्ड, फ्लावर्स, बैलून, चॉकलेट …… और फिर पार्टी तो बनती है।


 30 जुलाई को हमारी प्यारी ममा का हैप्पी-बर्थ डे है। ममा तो हम लोगों के लिए इतना कुछ करती हैं।  रियली यू आर सो स्वीट ममा। प्यारी ममा को जन्मदिन पर ढेर सारी बधाइयाँ और प्यार। Many-Many happy returns of the day Mom. U r the best Mom.


गुरुवार, जून 05, 2014

पर्यावरण को बचाने की पहल

 आज 'विश्व पर्यावरण दिवस' है। देखिये, ये सभी चित्र आपसे कुछ कह रहे हैं। हम भी यदि सोचें तो  अपने पर्यावरण को बचा सकते हैं, सुरक्षित रख सकते हैं।  








शुरुआत अपने घर से कर सकते हैं।


पेड़-पौधे हमारे अच्छे मित्र  हैं।  इन सबका ख्याल भी हमें ही रखना होगा। यदि हम इनका ख्याल नहीं रखेंगे तो बड़े होकर इन्हें कैसे देख पाएंगे।  अपूर्वा पौधों को पानी देते हुए ऐसा ही कुछ सोच रही है  !!










 तैयार हैं न आप सभी, अपने पर्यावरण को बचाने के लिए। 









गुरुवार, मई 22, 2014

नन्ही ब्लॉगर पाखी की ऊंची उड़ान


अक्षिता (पाखी)  देश की सबसे छोटी हिन्दी ब्लॉगर के रूप में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से (मात्र चार वर्ष की उम्र में) सम्मानित हो चुकी हैं। दिल्ली के हिन्दी भवन में इंटरनेशनल ब्लॉगर कांफ्रेंस में जब हिस्सा लेने गयीं तो सभी ने उन्हें गोद में उठा लिया। यहां उन्हें आर्ट और ब्लॉगिंग के लिए राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' का अवार्ड दिया गया। वह 'हिन्दुस्तान टाइम्स वुमेन अवार्ड' के लिए सबसे कम  उम्र में भी नॉमिनेट हो चुकी हैं। अब तो जैसे जहां भी ब्लॉगरों का सम्मेलन होता है तो पाखी को जरूर बुलाया जाता है। जब वह लखनऊ, काठमांडो के अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में आयीं तो आयोजकों के अलावा वहां देश-दुनिया से आये चुनिंदा ब्लॉगरों ने खूब आशीर्वाद दिया। अब पाखी स्वयं अपने ब्लॉग को होल्ड करती हैं। जब कुछ नया रचित होता है तो तत्काल पोस्ट कर देती हैं। अक्षिता (पाखी) बड़ी होकर आईएएस बनकर गरीबों की मदद करना चाहती हैं.

‘मेरा नाम अक्षिता है। मेरा निक नेम पाखी है। पाखी यानी पक्षी या चिड़िया। मैं भी तो एक चिड़िया हूं जो दिन भर इधर-उधर फुदकती रहती हूं। मेरा जन्म 25 मार्च 2007 को कानपुर में हुआ और फिलहाल मैं क्लास दो की स्टूडेंट हूं। ..’ यह है ‘पाखी की दुनिया’ की नन्ही ब्लॉगर अक्षिता यादव उर्फ पाखी के ब्लॉग की चंद लाइनें। पाखी देश की पहली सबसे कम उम्र की हिन्दी ब्लॉगर के रूप में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (2011) विजेता हैं। उन्हें यह पुरस्कार मात्र चार साल की उम्र में महिला और बाल विकास मंत्रालय की तत्कालीन मंत्री कृष्णा तीरथ द्वारा प्रदान किया गया। इसी साल नयी दिल्ली के हिन्दी भवन में आयोजित इंटरनेशनल ब्लॉगर कांफ्रेंस में ‘बेस्ट बेबी ब्लॉगर अवार्ड’ से पाखी को नवाजा गया। हिन्दुस्तान टाइम्स वुमेन अवार्ड (2013) के लिए भी उन्हें नन्ही ब्लॉगर के रूप में अभिनेत्री शबाना आजमी, सांसद डिम्पल यादव और संगीतकार साजिद द्वारा सम्मानित किया गया। लखनऊ में आयोजित द्वितीय अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन (2012) में विशेष रूप से सम्मानित किया गया। काठमांडो में आयोजित तृतीय अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में वह सबके आकर्षण का केन्द्र रहीं और वहां के पूर्व मंत्री तथा संविधान सभा के अध्यक्ष अर्जुन नरसिंह केसी  ने सम्मानित किया।

अक्षिता (पाखी)  का जन्म कानपुर में हुआ। उस वक्त उनके पिता केके यादव पोस्टल सर्विसेज में निदेशक थे। मां आकांक्षा और पापा अपने ब्लॉग में कुछ न कुछ पोस्ट किया करते थे। पाखी ने पूछा कि आप लोग मेरी पेंटिंग्स क्यों नहीं पोस्ट करते! पाखी की बात सबको क्लिक कर गयी। 24 जून 2009 को शुरू हुआ ‘पाखी की दुनिया’ का ब्लॉग। शुरू-शुरू में ड्राइंग को अपलोड किया गया। पाखी का क्रिएशन यहीं तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अपने किस्से- कहानी गढ़ने शुरू किये जो उन्हीं की भाषा में मां लिखकर पोस्ट कर देतीं। फिर कविताएं और विचार भी पोस्ट होने लगे। पिता ने कैमरा खरीदकर दिया तो पाखी के खींचे बेहतरीन चित्र भी ब्लॉग में जगह पाने लगे। विविधता लिये पाखी का ब्लॉग बेहद पसंद किया जाने लगा। देश की सीमा को लांघकर लगभग सौ देशों में 272 लोग नियमित फालोअर बन गये। जब पाखी की पहुंच फेसबुक तक हुई तो वहां तो लगभग 1000 फालोअर बन गये। गूगल प्लस में भी 240 फालोअर पाखी के ब्लॉग के पक्के पाठक बन गये। पाखी की इसी क्रियेटिविटी और लोकप्रियता से प्रभावित होकर राजस्थान के मशहूर बाल साहित्यकार दीनदयाल शर्मा ने अपनी बाल कविता की किताब ‘चूं-चूूं’ पर पाखी का चित्र ही लगा लिया।

पाखी के ब्लॉग में ‘शब्द शिखर’, ‘शब्द सृजन की ओर’, ‘डाकिया डाक लाया’, ‘सप्तरंगी प्रेम’, ‘बाल दुनिया’, ‘उत्सव के रंग’, ‘अपूर्वा’ जैसे उनके पारिवारिक ब्लॉगों के भी लिंक हैं। पाखी के ब्लॉग में  बेहद रोचक जानकारियां, पेंटिंग, फोटोग्राफ, कविताएं, संस्मरण, विचार, पत्र, यात्रा वृत्तांत और स्कूल की गतिविधियों के अलावा परिवार में होने वाली छोटी और सच्ची घटनाएं भी निरंतर जगह पा रही हैं। पाखी के कुछ पोस्ट यथा ‘बेटियों को मारो नहीं’, ‘ममा का जन्मदिन आया’, ‘पाखी माने पंछी या चिड़िया’ और अंडमान-निकोबार के 62वें वन महोत्सव पर ‘पाखी का गुलाब’ आदि पोस्ट सचमुच पठनीय हैं। पाखी अब अपनी साम्रगी अपने ब्लॉग (http://pakhi-akshita.blogspot.in/) पर स्वयं अपलोड कर लेती हैं। 

अक्षिता (पाखी)  की मम्मी आकांक्षा यादव बताती हैं कि पाखी बेहद शरारती हैं लेकिन उससे ज्यादा क्रियेटिव हैं। उन्हें पेंटिंग के अलावा फोटोग्राफी, कम्प्यूटर गेम, डांस और पढ़ना भाता है। वह अपने स्कूल गर्ल्स हाई स्कूल, इलाहाबाद में क्लास दो की स्टूडेंट हैं। शाकाहारी पाखी को पनीर के बने आइटम्स, पनीर पुलाव, पनीर परांठे, पनीर पकौड़े और आइसक्रीम बेहद पसंद हैं। पाखी की एक छोटी बहन अपूर्वा भी हैं जिनके साथ उनकी खूब छनती है। पाखी अंडमान-निकोबार को काफी मिस करती हैं जहां उन्होंने काफी इंज्वॉय किया और अपने ब्लॉग में शेयर भी किया। 

अक्षिता (पाखी)  के पिता केके यादव बताते हैं कि पाखी जब मात्र दो साल की थीं तभी से मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप से दोस्ती कर ली थी। अगर देखा जाए तो आज बच्चों के खिलौने बदल गये हैं। नये-नये गैजेट्स ही उनके खिलौने बन गये हैं। यह बदलाव अच्छा है। ये बच्चों में क्रियेटिविटी बनाये रखते हैं। आज पाखी अपना ब्लॉग स्वयं हैंडिल करती हैं। नेट द्वारा वह विस्तृत संसार में विचरण कर अपनी जानकारी को बढ़ा रही हैं। पाखी बड़ी होकर आईएएस ऑफिसर बनना चाहती हैं। पाखी को अपनी किताबें फेंकना या बेचना पसंद नहीं है। वह अपनी किताबें, खिलौने और कपड़े जरूरतमंद को देना पसंद करती हैं।

जब अक्षिता (पाखी)  की पहुंच फेसबुक में हुई तो वहां तो लगभग 1,000 फॉलोअर बन गये। गूगल प्लस में भी 240 फॉलोअर्स पाखी के ब्लॉग के पक्के पाठक बन गये.

(हिंदी के प्रतिष्ठित अख़बार 'राष्ट्रीय सहारा' के बाल परिशिष्ट 'जेन एक्स' (22 मई, 2014) में अक्षिता (पाखी) के बारे में ''नन्ही ब्लॉगर पाखी की ऊंची उड़ान'' शीर्षक से प्रकाशित फीचर आलेख. इसे आप http://www.rashtriyasahara.com/epapermain.aspx?queryed=15 ऑनलाइन लिंक पर जाकर भी पढ़ सकते हैं। )

रविवार, मई 18, 2014

'Akshita (Pakhi) : पाखी की दुनिया' की फेसबुक पर लाइकिंग हजार के पार




हमारे फेसबुक  पेज (https://www.facebook.com/AkshitaaSingh) के प्रति आप सभी के प्यार, स्नेह, समर्थन और शुभकामनाओं के लिए आभार। आज इस पेज को लाइक करने वालों की संख्या 1, 000 से ऊपर पहुँच गई !!

Thanks for all Support, Likings n Blessings for our Facebook Page (https://www.facebook.com/AkshitaaSingh). Today this paje finally got more than 1,000 likes.


बुधवार, मई 14, 2014

बुद्धम् शरणम गच्छामि

बुद्धम् शरणम गच्छामि … लुम्बिनी में जन्म, बोधगया में ज्ञान, सारनाथ में प्रथम उपदेश, कुशीनगर में निर्वाण …… इनमें से बोधगया को छोड़कर सभी जगहों का दर्शन हम कर चुके हैं।  संयोगवश, आज बुद्ध पूर्णिमा भी है।  बुद्ध का माध्यम मार्ग जीवन का सार भी बताता है। बुद्ध पूर्णिमा पर शत-शत नमन !!



जब पिछले साल हम लुम्बिनी, नेपाल गए थे तो वहाँ बुद्ध की जन्मस्थली के बाहर का दृश्य।



सारनाथ में प्रथम उपदेश



कुशीनगर में निर्वाण